पर्यटन विकास से मिलेगी स्थानीय विकास को गति - भूपेश
रायपुर
उपयोगी निर्माण-जन हितैषी अधोसंरचनाएं और आपकी अपेक्षाएं विषय पर लोकवाणी की 15वीं कड़ी में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे कार्यो के संबंध में लोकवाणी में कहा कि प्रदेश में एक दौर ऐसा आया था, जब पर्यटन को कुछ प्रचलित केन्द्रों में ही समेटकर रखने और मॉल कल्चर में ढालने के प्रयास हो रहे थे। दुनिया में अपनी प्राचीन धरोहरों को सहेजने और प्राकृतिक सुन्दरता के स्थानों में अधोसंरचना के विकास के प्रयासों को सराहा जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसा नहीं हो रहा था, इसलिए हमने पर्यटन विकास की संभावनाओं को बहुत बड़े फलक में आकार देने का प्रयास किया है। इस क्रम में जशपुर जिले के सरना-बालाछापर तथा कोइनार-कुनकुरी में, बिलासपुर जिले के कुरदर में, कोण्डागांव जिले के धनकुल में, कांकेर जिले के नथिया नवागांव में एथनिक रिसॉर्ट, सरगुजा जिले के महेशपुर में साइट एमेनिटी का विकास किया जा रहा है। सिरपुर को ऐतिहासिक बौद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विश्व के मानचित्र में स्थान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। वाटर टूरिज्म तथा एडवेंचर टूरिज्म के लिए कोरबा जिले के सतरेंगा, धमतरी जिले के मेडम सिल्ली डेम जिसका नामकरण हमने बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव के नाम पर किया है तथा रविशंकर डेम गंगरेल, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के मलानिया जलाशय, कांकेर जिले के दुधावा जलाशय, महासमुन्द जिले के कोडार डेम, बिलासपुर जिले में संजय गांधी जलाशय खुंटाघाट-रतनपुर में अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है।
बघेल ने कहा कि राम वनगमन पथ में आने वाले 75 स्थानों का चयन अधोसंरचना विकास के लिए किया गया है, जिसके प्रथम चरण में 9 स्थानों जैसे सीतामढ़ी हरचौका, रामगढ़, शिवरीनारायण, तुरतुरिया, चंदखुरी, राजिम, सिहावा सप्तऋषि आश्रम, जगदलपुर तथा रामाराम में समुचित अधोसंरचना के विकास का काम शुरू किया गया है। दामाखेड़ा में कबीर सागर के विकास का काम हाथ में लिया गया है। सूरजपुर की पहाड़ी में स्थित बागेश्वरी मंदिर और कुदरगढ़ में रोप वे सहित समुचित अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। रायपुर का बूढ़ातालाब एक ओर जहां आदिवासी समाज के पूज्य बूढ़ादेव की याद दिलाता है, वहीं स्वामी विवेकानंद के रायपुर प्रवास की स्मृति भी ताजा करता है। इस तरह हमने आम जनता के लिए किफायती और स्वस्थ मनोरंजन स्थलों के विकास को प्राथमिकता दी है, जो हमारे प्रदेश की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विशेषताओं से मेल खाते हैं। मुझे विश्वास है कि पर्यटन विकास को लेकर हमारी सोच का लाभ बड़े पैमाने पर मिलेगा, इससे स्थानीय विकास में बहुत गति मिलेगी तथा नए रोजगार के अवसर भी बनेंगे।
राज्य सरकार की अधोसंरचना विकास की नई सोच पर अपने विचार रखते हुए रायपुर के नवीन अग्रवाल ने कहा कि ये सुनकर बहुत अच्छा लगता है कि बस्तर के दंतेवाड़ा जैसे सुदूर इलाके में सरकार के सहयोग से रेडीमेड कपड़ों की इंडस्ट्री खुली है और डेनेक्स ब्रांड लांच हुआ है। उन्होंने सड़क, बिजली और कनेक्टीविटी को लेकर मुख्यमंत्री का विजन जानना चाहा। कोरबा जिले की गेवरा की गीत तिवारी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नवा चिन्हारी सस्ता बिजली जम्मो दुआरी। आपने हम सबको देश में सबसे सस्ती बिजली, वह भी आधी कीमत पर उपलब्ध कराई है।
मुख्यमंत्री ने इन श्रोताओं जिज्ञासा के संबंध में कहा कि मुझे यह सुनकर अच्छा लगा कि दंतेवाड़ा के ब्रांड डेनेक्स की धमक राजधानी रायपुर में ठीक ढंग से सुनी गई। मैं आपकी बात से सहमत हूं कि छत्तीसगढ़ कंज्यूमर नहीं बल्कि उत्पादक राज्य है। आपको याद होगा कि मैंने बिजली के बारे में कहा था कि हमें सिर्फ उत्पादक राज्य नहीं बने रहना है, बल्कि उपभोक्ता राज्य भी बनना है। मैं नहीं चाहता कि हमारे राज्य के बहुमूल्य संसाधनों का उपयोग करके देश और दुनिया के दूसरे हिस्से के लोग तो समृद्ध और खुशहाल हो जाएं लेकिन छत्तीसगढ़ के लोग हमेशा संघर्ष ही करते रहें।
मेरा मानना है कि बांध बनें तो नहर-नालियों का निर्माण उसके साथ जुड़ा होना चाहिए। बिजली का उत्पादन ठीक से हो तो उसे कारखानों, अस्पतालों, घरों, दफ्तरों, खेतों में पहुंचाने के लिए पूरा नेटवर्क बनें। सड़कों का नेटवर्क पुल-पुलियों के बिना अधूरा है। लोगों से जुड़े सरकारी काम-काज के लिए भवन बनें तो वहां पहुंचने के लिए सड़कें भी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो निर्माण पर लगी मोटी रकम बरबाद हो जाती है। दुर्भाग्य से पिछले डेढ़-दो दशक में छत्तीसगढ़ को ऐसी ही परिस्थितियों से दो-चार होना पड़ा था। इसलिए हम चंद महंगी और सजावटी सड़कों-भवनों की बात नहीं करना चाहते। बल्कि नेटवर्क कम्पलीट करने के बारे में बात करते हैं। अधोसंरचना विकास को लेकर मेरी यही सीधी और स्पष्ट सोच है।

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